Friday, 20 March 2015

तुम्हारे लिए..

अगर तुम बन गयी दीपक तुम्हारी लौ बनूँगा मैं,
नदी के शोर में शायद तुम्हारी धुन सुनूंगा मैं.
तुम्हारी याद में अक्सर यहाँ आंसू  टपक पड़ते,
ये मोती है मेरे प्रीतम मगर कब तक गिनूंगा मैं...
  ..art

No comments:

Post a Comment