मुक्तक 4

आज फिर लगा दिल से अभी भी आग उठती है,
 कभी वो याद आ जाये कहानी जाग उठती है…

चन्दन मेरा वजूद है लिपटे हुए हैं सांप ,

 बेबस की ये दवा है क्या मीर किया जाये .
   ...atr

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