Posts

Showing posts from 2017

तुम्हारे हिज़्र में

दो दिन की मुलाकात थी, आधी अधूरी बात थी,
वो छोड़ के चला गया , जिंदगी उदास थी|
एक रात मैं सोया हुआ, ख्वाब में वो आ गया ,
सोये हुए दर्द को फिर से जगा गया |

पर  मीर वक़्त का क्या कहिये, हर चीज़ को चकमा देती है,
हर शख्स ग़ुलामी करता है, हर चोट को फिर भर देती है|

था मेरा हाल बुरा उस दिन , जिस दिन वो छोड़ के भागा था,
पर अब देखो मैं हँसता हूँ , पहले मैं बड़ा अभागा था|
 ज़िन्दगी की यही कहानी है, यह  दुनिया ही दीवानी है,
कोई न किसी का दोस्त यहां , हर रिश्ता पर रूमानी है|
हर वस्ल  में खुश्बू होती है , हर हिज़्र में आंसू  बहते है|
न कोई हकीकतगोई है , सपनों का , ख्वाबों का धोखा|

उस ख्वाबों में जीने का अपना ही एक एहसास है,
पहले वो जितना पास था , अब भी वो उतना पास है|

...atr

कभी जब शाम हो जाये , सुबह के गीत गया कर.

कभी जब शाम हो जाये , सुबह के गीत गया कर.
ये रातें भ्रमित करती है, न इस चक्कर में आया कर.

कभी सांसों में अटकी हो किसी के प्यार की खुश्बू,
फ़िज़ा महकाना चाहे तो  मीर को गुनगुनाया कर.

जिंदगी प्रेम है, उत्साह  है , आनंद पूरा है,
सलीके से जियें , हर पल का बस उत्सव मनाया कर.

ग़ज़ब की सादगी थी मीर उसके हिज़्र में देखो,
वो ख्वाबों में चली आयी ये कहने , "मुस्कराया  कर"

...atr

मुक्तक

सफेदी ओढ़ कर यूँ चाँद तंग मुझको न कर तू ,
कफ़न जिस दिन भी ओढूंगा , ज़माना सारा रोयेगा.
...atr

तेरा घर

मुझे कुछ भी कहीं पर याद आये तो तेरा घर हो,
ग़र कहीं पर जान जाये तो तेरा घर हो.
नियति मासूक से मिलने का मौका भी नहीं  देगी,
ग़र कहीं दीदार हो जाये  तेरा घर हो.
बदन पर सिलवटें दिखने लगी है  उम्र बाक़ी है,
कहीं ग़र रूह भी मुरझाना चाहे तो तेरा घर हो.
विदाई के समय रोये थे हम दोनों गले मिल कर ,
वो आंसू  आँख से गिर जाना चाहें तो तेरा घर हो.
मुकद्दर ने लिया है  छीन मुझसे दोस्ती का सुख,
कभी जब दुश्मनी आज़माना चाहे तो तेरा घर हो.
मुझे कुछ भी कहीं पर याद आये तो तेरा घर हो.
...atr