Saturday, 21 March 2015

मुक्तक7

जिंदगी बीत जाती है किसी को चाह कर कैसे? 
कोई  बतलाये  तो मुझको मैं जीना भूल बैठा हूँ...


अदा भी तुम ,कज़ा भी तुम ,मेरे दिल की सदा भी तुम,
तुम्ही  अब चैन हो मेरे ,मेरे दिल की दुआ भी तुम..
तुम्हारे प्यार की उल्फत मेरे दिल की ये तन्हाई,
तुम्हारे प्यार की आहट मुझे जब शाम को आई
सुबह तक सो न पाया मैं, बस यही याद थी दिल में,
कि मैं तूफ़ान में अटका ,नहीं हो तुम भी साहिल में...

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|| गुमनाम पत्र ||

|| गुमनाम पत्र || (स्नातक के समय लिखा हुआ अपूर्ण , परित्यक्त ग्रामीण अंचल पर आधारित उपन्यास का एक अंश ) -अभिषेक त्रिपाठी माघ महीने के दो...