Saturday, 5 May 2018

|| मिलन ||

मिलना 3 अक्षरों का शब्द है, मिलते 2 ही लोग हैं तीसरी जो उनकी एकाकार भावनाएं हैं वो तो उनके बीच ही हिलती रहती हैं, उन दोनों के बीच ! फिर शर्म के पहिये पर बैठकर बातों के साथ बहुत दूर निकल जाती है | लौटकर आती है तो मिलने वाले दोनों एक हो गए रहते हैं शर्म का पहिया टूट चुका होता है | असमंजस में भावनाएं फिर से एक नहीं हो पातीं | एकाकार होना सिद्धि है जो लौकिक प्रेम की भावनाओं का स्वभाव नहीं है |
इसलिए उस संसर्ग के बाद लौटते हैं 3 लोग, जिसमे 2 भावनाएं होती है| टूटी हुई! 

Abhishek

|| गुमनाम पत्र ||

|| गुमनाम पत्र || (स्नातक के समय लिखा हुआ अपूर्ण , परित्यक्त ग्रामीण अंचल पर आधारित उपन्यास का एक अंश ) -अभिषेक त्रिपाठी माघ महीने के दो...