Wednesday, 16 December 2015

कल्पना

expecting ur reviews and kind attention with ur graceful words ..
जब धरा उठ कर बने आकाश तो अच्छा लगे ,
जब मही की तृप्ति को बादल करे बरसात तो अच्छा लगे.
है अँधेरा, धुंध सा है,राह पथरीली बहुत ,
इस घुटन को चीर कर लूँ साँस तो अच्छा लगे.
मन शांत हो, जिज्ञाशु बुद्धि , और दया संचार हो,
भीड़ से उठकर कोई बोले “शाबास “तो अच्छा लगे .
खोज हो जब सत्य की , और धर्म  का संधान हो ,
शक्ति और क्षमता करें सहवास तो अच्छा लगे .
हो यहाँ प्रज्ञा अकल्पित , प्रेम का संगीत हो ,
धैर्य और साहस पर , हो अटल विश्वास तो अच्छा लगे .
हर कदम पर ,हर शहर में , हर ग़ज़ल हर गीत में ,
हो जहाँ भी मीर तेरी बात तो अच्छा लगे ..
…atr

No comments:

Post a Comment